सिविल सेवा: तैयारी की रणनीति

किसी भी परीक्षा में सफल होने के लिए एक आवश्यक रणनीति पूर्व शर्त है। देश में होने वाली सभी कैरियर परीक्षाओं में सिविल सेवा का स्थान सर्वोपरि है। अतः इसकी तैयारी के लिए एक सटीक, योजनाबद्ध और वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित कार्य योजना (Planning) की नितांत आवश्यकता होती है।

एक निश्चित कार्य-योजना (Planning) एक आवश्यक शर्त

'सामान्य अध्ययन प्रारंभिक परीक्षा: एक दिशा' में हमने एक सुनियोजित एवं वैज्ञानिक योजना की चर्चा की है, जो अन्य सभी वैकल्पिक विषयों के लिए भी समान रूप से उपयोगी है। प्रत्येक विद्यार्थी की अपनी-अपनी कार्ययोजना होती है जो निश्चित ही उनके अनुकूल होती है अतएव सुंदर भी होती है। मेरा आशय बस इतना है कि एक कार्य योजना तो अवश्य ही होनी चाहिए। आप जानते हैं कि सिविल सेवा परीक्षा एक लंबी प्रक्रिया है क्योंकि इसके तीन चरणों-प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार के सम्पन्न होने में पूरे वर्ष का समय लगता है। अतः इसके लिए राह इतनी आसान होनी चाहिए कि सफर का पता ही नहीं चले। एक सटीक व निश्चित कार्य योजना से ही ऐसा संभव है। आगे मैं इसी प्रभावकारी योजना के विभिन्न चरणों (Steps) की चर्चा करने जा रहा हूँ।

किसी भी कार्य को करने के लिए कुछ निश्चित मूलभूत सिद्धांत होते हैं, जैसे-एक निश्चित योजना (Planning), आवश्यक संसाधन (Resources), एक रणनीति (Strategy), समयानुकूल पर्यवेक्षण (Supervision), सम्यक निष्पादन (Execution) और एक तय समय सीमा (Time Schedule), इन सबके लिए आवश्यक है 'समय प्रबंधन' (Time Management) अर्थात् यह पता होना चाहिए कि कब क्या करना है, कब तक करना है, कैसे करना है, आवश्यक रणनीति क्या है और उपलब्ध संसाधन कौन-कौन से हैं? इन्हीं सब बातों के लिए कार्य-योजना आवश्यक है। कार्य-योजना भी दीर्घकालिक (Long Term) और अल्प-कालिक (Short Term) होनी चाहिए।

अब मैं प्रस्तुत कार्य-योजना के विभिन्न चरणों (Steps) की क्रमशः चर्चा करने जा रहा हूँ:

STEP – 1: पाठ्यक्रम (Syllabus) और पूर्व में पूछे गये प्रश्नों से संबंधित रणनीति

सर्वप्रथम, सामान्य अध्ययन के पूरे पाठ्यक्रम का विस्तृत अध्ययन करें। पाठ्यक्रम के अनुसार अध्यायक्रम से (Chapterwise) पूर्व में पूछे गये प्रश्नों का भी अवलोकन करें। पाठ्यक्रम और पूर्व में पूछे गये प्रश्नों के अवलोकन से आपको यह पता चलेगा कि कौन-सा अध्याय और अध्याय का कौन-सा भाग महत्वपूर्ण है। जो अध्याय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है अर्थात् जिससे सबसे ज्यादा प्रश्न अब तक पूछे गये हैं उन्हें आप श्रेणी-'ए' में रखें। इसके बाद जिस अध्याय से ज्यादा प्रश्न पूछे गये हैं उसे श्रेणी-'बी' में और सबसे कम पूछे गए प्रश्नों वाले अध्यायों को श्रेणी-'सी' में रखें। इस प्रकार इन श्रेणियों के अनुसार पाठ्यक्रम (Syllabus) को देखते हुए मेरे विचार से सामान्य अध्ययन का एक अपना पाठ्यक्रम (Syllabus) बनाया जा सकता है। अतः अब आप अपना एक 'आदर्श पाठ्यक्रम' (My Ideal Syllabus) तैयार करें।

STEP – 2: पुस्तकों का चयन और पढ़ने की तकनीक

मेरे विचार से 'सामान्य अध्ययन' प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रत्येक खंड पर कम-से-कम चार पुस्तकों का अध्ययन किया जाना चाहिए जिसमें दो पुस्तकें बेसिक पुस्तक होंगी और दो एडवांस। बेसिक पुस्तक के अंतर्गत एनसीईआरटी और एन. बी. टी. या प्रकाशन विभाग की पुस्तक का उल्लेख किया जा सकता है। जब हम इन दो बेसिक पुस्तकों पर शत-प्रतिशत पूर्णता हासिल कर लें तब एडवांस श्रेणी की दो पुस्तकों को पढ़ें। हमने आगे इसी आलेख में बेसिक व एडवांस पुस्तकांे की अनुशंसित सूची (Suggested Readings) दे रखी है।

अब मैं पुस्तकों के पढ़ने की तकनीक पर चर्चा करूंगा। मान लेते हैं कि हमें अध्याय मौलिक अधिकार तैयार करना है-

  • सर्वप्रथम, एनसीईआरटी से मौलिक अधिकार अध्याय को दो बार तेजी से पढ़ें। इसी दौरान आप पुस्तक के महत्वपूर्ण बिंदुओं को पेंसिल से रेखांकित कर लेने का कार्य भी कर लें। अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदुओं को लाल रंग से रेखांकित करें। तीसरी बार एनसीईआरटी के इसी अध्याय को धीरे-धीरे पढ़ें और तथ्यों को समझने की कोशिश करें।
  • एनसीईआरटी पढ़ लेने के बाद दूसरी बेसिक पुस्तक से अध्याय मौलिक अधिकार को इसी तकनीक से पढ़ें। इन दो किताबों को पढ़ लेने के बाद आप नोट्स बनाने की प्रक्रिया भी पूर्ण कर लें और तब एडवांस पुस्तक से इसी अध्याय को पढ़ें।
  • बोल-बोल कर पढ़ना एक अच्छी विधि है क्योंकि इससे आपका ध्यान नहीं बंटता और आपका मस्तिष्क, आँखें और कान तीनों एक साथ सक्रिय रहते हैं। फलस्वरूप अध्ययन में एक गहराई आती है। पुस्तक को पढ़ते समय पंक्तियों के नीचे पेन, पेंसिल अथवा उँगली को रखते हुए पढ़ें।

नोट: सामान्य अध्ययन के लिए अनुशंसित पुस्तकों (Suggested Reading) की सूची इस पुस्तिका में दी गई है।

STEP – 3: नोट्स बनाने की तकनीक

मेरे विचार से एक निश्चित कार्य-योजना के तहत नोट्स बनाने की प्रक्रिया होनी चाहिए क्योंकि रीविजन की प्रक्रिया पूर्णतया आपके नोट्स के आकार व वैज्ञानिक क्रमबद्धता पर निर्भर करती है। अंतिम एक महीने में, पूर्व में की गई तैयारी का तीन बार पुनरावलोकन (Revision) आवश्यक है। यह पुनरावलोकन आपके नोट्स बनाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

यदि हमें भारतीय राजव्यवस्था का नोट्स बनाना हो तो इसके लिए हम तीन नोट बुक लेंगे। अगर हम भारतीय राजव्यवस्था में मौलिक अधिकार का नोट्स बना रहे हैं तो दो बेसिक पुस्तकों में से सारे महत्वपूर्ण तथ्यों को संक्षिप्त रूप से, स्पष्टता के साथ, पहली नोट बुक में लिख लेंगे। दूसरी नोट बुक में हम एडवांस पुस्तकों से हासिल किये गये मौलिक अधिकार के तथ्यों को लिखंेगे। तीसरी नोट बुक में अन्य पुस्तकों व टेस्ट पेपरों से प्राप्त मौलिक अधिकार से संबंधित विविध तथ्यों को लिखंेगे।

STEP – 4: याद करने की तकनीक

इस चरण के लिए सर्वप्रथम एनसीईआरटी से मौलिक अधिकार को तेजी से दो बार पढ़ें फिर अपने द्वारा चुनी गयी दूसरी बेसिक पुस्तक का अध्ययन करें। इस प्रकार से किये गये क्रमिक अध्ययन से आपको अपने द्वारा बनाये गये नोट्स को पढ़ कर याद करने में और याद रखने में एक सुसंगतता प्राप्त होगी। इन दो पुस्तकों को पढ़ लेने के बाद आप अपना सबसे पहला नोट बुक उठायें उसमें मौलिक अधिकार के पृष्ठों की संख्या को देखंे और उसे याद कर लेने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय करें, जैसे-प्रत्येक पृष्ठ को याद करने के लिए दस से पद्रह मिनट का समय सही है। इसके बाद यही क्रम दूसरे एवं तीसरे नोट बुक के लिये भी अपनाया जाना चाहिए।

आप सभी सहमत होंगे कि जब परीक्षा नजदीक होती है तो सब कुछ सहज ही याद हो जाता है अर्थात् याद करने की असीमित क्षमता मस्तिष्क में होती है। बस हम इसका भरपूर इस्तेमाल नहीं करते हैं।

नोट:

  • जब भी पढ़ें मस्तिष्क को यह संदेश दें कि आप जो भी पढ़ रहे हैं वह आपको याद हो रहा है। यह प्रक्रिया मस्तिष्क को सकारात्मक संदेश ग्रहण करने के लिए उत्प्रेरित करने की सटीक विधि है।
  • इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि आपके पढ़ने की टेबल सदैव साफ-सुथरी होनी चाहिए। आपका आदर्श पाठ्यक्रम (My Ideal Syllabus) सामने चिपका होना चाहिए। किसी भी टाॅपिक को खत्म करने के बाद उस टाॅपिक को सामने चिपके पाठ्यक्रम में चिह्नित करें-यह आपके आत्मविश्वास को बढ़ायेगा।

STEP – 5 स्वमूल्यांकन (Self-Test)

स्वमूल्यांकन के लिए यथा-सम्भव वस्तुनिष्ठ प्रश्नों (Objective Questions) का अभ्यास करना चाहिए। इसके लिए किसी भी स्तरीय प्रश्न-कोश का सहारा ले सकते हैं। स्वमूल्यांकन (Self Test) के लिए भी दो-तीन बातों का ध्यान रखें:
  • अभ्यास करते समय जो प्रश्न आपसे हल नहीं हो पाता, समझ लीजिए कि वह आपका कमजोर पक्ष (Weak Point) है ऐसे प्रश्न के ऊपर गोल चिह्न डाल दें ताकि सहज ही आपकी उस पर नजर जाये। इस प्रश्न को तीसरी नोट बुक में नोट कर लें।
  • प्रश्न-कोश से प्रश्नों को हल करने बाद किये गये मूल्यांकन में यदि आपके 100 में 50 नम्बर आते हैं तो आपका प्रतिशत 50 है। इसे आप प्रश्न-कोश के अंत में लिख लें और तिथि भी डाल लें ताकि जब आप अगली बार प्रश्नों को हल करें तो आपको यह पता चले कि आपको कितने प्रतिशत अंक अधिक आये हैं। इस बार भी आपके द्वारा प्राप्त प्रतिशत को प्रश्न-कोश के अंत में तिथि सहित लिख लें। जब भी आप टेस्ट दंे यह कार्य जरूर करें।
  • परीक्षा के ठीक एक महीने पूर्व सुपर रीविजन (Super Revision) के लिये प्रश्न-कोश के उत्तरों का फोटोस्टेट करवा लें। सुपर रीविजन के दौरान प्रश्न व उत्तर साथ-साथ रखें। इस तरह दोनों को एक साथ देख सकेंगे और आपके बहुमूल्य समय की बचत होगी।

STEP – 6: परीक्षा हाॅल रणनीति (Examination Hall Strategy)

परीक्षा का समय नजदीक आ चुका है और अब तक ऊपर बताये गये चरणों (Steps) पर चलकर आपकी तैयारी पूर्णता प्राप्त कर चुकी है। अतः नीचे बताये जा रहे बातांे का विशेष ध्यान रखें:
  • परीक्षा के एक दिन पूर्व 1 बजे दिन तक पढ़ाई बंद कर दें। परीक्षा के पूर्व पर्याप्त एवं अच्छी नींद आवश्यक है।
  • परीक्षा भवन में लाइट मूड से जायें। प्रश्न-पत्र के ऊपर दिये गये निर्देशों को ध्यान से पढ़ें।
  • जब परीक्षक प्रश्न हल करने को कहे तो प्रश्न हल करना शुरू करें। सबसे पहले उन प्रश्नों को तेजी से हल कर लें जिनमें आप स्वयं को शत-प्रतिशत सुरक्षित महसूस करते हैं। वैसे प्रश्नों को गोल करते हुए आगे बढ़ते जायें जिन्हें आप नहीं जानते हैं। अब आप दुबारा प्रश्नों को हल करने का प्रयास करें और प्रश्न अगर हल होता हो तो उसे हल करें। जिन प्रश्नों के बारे में आपने कभी नहीं सुना है उसे उत्तरों के टेंªड को देखकर या अपने आई.क्यू. (I.Q.) के हिसाब से हल करने की कोशिश करें। ऐसे दस प्रश्न प्रत्येक प्रश्न-पत्र में दिये जाते हैं ताकि आप उन प्रश्नों में उलझ जायें। लेकिन ऐेसे प्रश्नों को देख कर आप विवेक से काम लेते हुए उनका हल तलाश करें।

आप परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए सामान्य अध्ययन हेतु अध्ययन सामग्री की एक आदर्श सूची प्रस्तुत की जा रही है। यह अध्याय-क्रम से वर्गीकृत है और पुस्तक से संबंधित अध्याय-मात्र के पठन की आवश्यकता पड़ेगी। पाठ्यक्रम के अनुसार पुस्तकों का अध्याय-क्रम से यहाँ किया गया वर्गीकरण एक मार्गदर्शक वर्गीकरण है जो गहन शोध और वर्षों के स्वाध्याय का परिणाम है। निश्चित ही इससे परीक्षार्थियों को लाभ पहुँचेगा।